इतिहास / स्थापन

खादी प्रेमियों ने वर्ष 1920 में मेरठ में श्री गाँधी आश्रम की स्थापना की। श्री गाँधी आश्रम मेरठ के अंतर्गत (हल्द्वानी) में गाँधी आश्रम का उत्पादन व बिक्री केन्द्र खोला गया। वर्ष 1960 में क्षेत्रीय श्री गाँधी आश्रम मुरादाबाद की स्थापना होने पर श्री गाँधी आश्रम (हल्द्वानी) मेरठ से अलग होकर मुरादाबाद से सम्बद्ध हो गया । जो वर्ष 1978 तक क्षेत्रीय श्री गाँधी आश्रम मुरादाबाद से सम्बद्ध रहा। वर्ष 1978-1979 में क्षेत्रीय श्री गाँधी आश्रम (हल्द्वानी) स्वत्रंत स्वायत्त संस्था के रूप में क्षेत्रीय श्री गाँधी आश्रम मुरादाबाद से अलग होकर अस्तित्व में आया तथा सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के अंतर्गत पंजीकृत हुआ।

खादी ग्रामोद्योग अधिनियम 1956 धारा 5 के अंतर्गत आयोग को ग्रामीण क्षेत्र में संस्था के माध्यम से खादी व ग्रामोद्योग की स्थापना व विकास का दायित्व सौंपा गया। क्षेत्रीय श्री गाँधी आश्रम (हल्द्वानी), खादी एंव ग्रामोद्योग आयोग के दिशा-निर्देश में जनपद नैनीताल,ऊधम सिंह नगर,चम्पावत में खादी व ग्रामोद्योग के विकास में कार्यरत है।

क्षेत्रीय श्री गाँधी आश्रम (हल्द्वानी) के दो उत्पत्ति केन्द्र काशीपुर जिला उधम-सिंह-नगर व हल्द्वानी जिला नैनीताल में स्थित हैं। श्री गाँधी आश्रम उत्पत्ति केन्द्र काशीपुर में गांव की कत्तिनों के द्वारा कताई कार्य कराकर व कताई किये हुए सूत को बुनकरों को देकर सूती खादी का उत्पादन किया जाता है! इस उत्पत्ति केंद्र में चादर, तौलिया, डस्टर, लिहाफ तैयार होता है। इसी प्रकार उद्योगशाला फतेहपुर में ऊनी शाल, चादर, स्वीटर इत्यिादि का उत्पादन स्थानीय ग्रामीण बेरोजगार बुनकर व कत्तिनों द्वारा कराया जा रहा है तथा इस बुनाई किये हुए सामान को क्षेत्रीय श्री गाँधी आश्रम द्वारा खोले गये बिक्री भण्डारों में बिक्री किया जा रहा है।

संस्थान ने वर्तमान में 1450 कत्तिन व 200 बुनकर को रोजगार प्रदान कर रखा हैं तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बुनकरों को कर्घे अपने संसाधनों से उपलब्ध कराये गये है। संस्था द्वारा समय समय पर ग्रामीण क्षेत्रों में बिभिन्न सामाजिक कल्याण के कार्य भी कराये जाते है। खादी कामगारों एंव कार्यकर्ताओं में क्षमता निर्माण हेतु कम्पयूटर प्रशिक्षण का आयोजन, फैशन डिजाइन प्रशिक्षण, समूह प्रबन्धन प्रशिक्षण, जागरूकता शिविर, स्वास्थ्य शिविर, शेक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम( जिनमें भारतीय उद्यमिता संस्थान, अमूल डेरी, इत्यिादि) तथा सरकार द्वारा चलायी जा रही विभिन्न योजनाओं से भी लाभ पहुँचाया जाता है। सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं के अन्र्तगत वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत बुनकरों के लिये वर्कशेड का निर्माण कराया गया है तथा विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों का अलग- अलग ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजन भी किया गया है। खादी कामगारों के सशक्तीकरण हेतु उनको अन्य योजनाओं से जोडा गया है। जिनमें जनश्री बीमा योजना,शिक्षा सहयोग योजना,समूह गठन,कार्यशाला निर्माण योजना तथा बैंक लिकेंज आदि प्रमुख है। संस्था द्वारा खादी कामगारों को जनश्री योजना के अन्र्तगत 1500 कत्तिन बुनकरों का बीमा तथा उनके बच्चों को शिक्षा सहयोग छात्रबृत्ति प्रदान की गयी तथा 1000 महिला कामगारों को स्वयं सहायता समूहों व फैडरेशन से जोडा गया है।