क्षेत्रीय श्री गाँधी आश्रम (हल्द्वानी), बुनकरों एवं कत्तिनों के सामाजिक एवं आर्थिक उन्नयन को समर्पित संस्थान है। वर्तमान में संस्थान ने 1450 कत्तिन व 200 बुनकर को रोजगार प्रदान कर रखा है| ग्रामीण क्षेत्रों में बुनकरों को कर्घे अपने संसाधनों से उपलब्ध कराये गये हैं। संस्था द्वारा समय-समय पर ग्रामीण क्षेत्रों में बिभिन्न सामाजिक कल्याण के कार्य भी कराये जाते हैं। खादी कामगारों एंव कार्यकर्ताओं के क्षमता विकास हेतु कम्पयूटर प्रशिक्षण का आयोजन, फैशन डिजाइन प्रशिक्षण, समूह प्रबन्धन प्रशिक्षण, जागरूकता शिविर, स्वास्थ्य शिविर, शेैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम तथा सरकार द्वारा चलायी जा रही विभिन्न योजनाओं से भी लाभ पहुँचाया जाता है। सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं के अन्तर्गत वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत बुनकरों के लिये वर्कशेड का निर्माण कराया गया है तथा विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों का अलग- अलग ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजन भी किया गया है। खादी कामगारों के सशक्तीकरण हेतु उनको अन्य योजनाओं से जोड़ा गया है। जिनमें जनश्री बीमा योजना,शिक्षा सहयोग योजना,समूह गठन,कार्यशाला निर्माण योजना तथा बैंक लिकेंज आदि प्रमुख है। संस्था द्वारा खादी कामगारों को जनश्री योजना के अन्तर्गत 1500 कत्तिन बुनकरों का बीमा तथा उनके बच्चों को शिक्षा सहयोग छात्रबृत्ति प्रदान की गयी तथा 1000 महिला कामगारों को स्वयं सहायता समूहों व फैडरेशन से जोड़ा गया है।
सफलता की कहानियां
टीना रावत
(कत्तिन)श्रीमती टीना रावत ने बताया कि चर्खा मिलने से पहले मैं घर में खाली रहा करती थी। मेरे परिवार में दो लड़कियां व एक लड़का है। चर्खा मिलने के बाद से जब मैंने प्रशिक्षण लेकर कताई का काम शुरू किया तो तब से रोजाना 6 से 8 घंटे कताई करके मुझे 60/- से 80/- रूपये प्रतिदिन की मजदूरी मिलने लगी। अब मुझे घर बैठे ही रोजगार प्राप्त हो रहा है। मेरा बीमा भी हुआ है| मेरे दो बच्चों को छात्रवृत्ति भी मिल रही है।
श्री इमामुद्दीन
(बुनकर)श्री इमामुद्दीन (उधम सिंह नगर) बताते हैं कि मेरे परिवार में 13 सदस्य हैं। मेरा भाई भी खादी बुनाई का कार्य करता है। मैं विगत कई वर्षों से श्री गांधी आश्रम जसपुर केन्द्र के माध्यम से पुराने करघे पर बुनाई करके मजदूरी के रूप में प्रतिमाह 4000.00 से 5000.00 रूपये कमा लेता था। इस कमाई से मेरे परिवार का खर्चा चला पाना मुश्किल होता है। स्फूर्ति योजना के बाद मेरी बुनाई क्षमता बढ़ गयी है जिससे मैं अधिक मजदूरी पाने लगा हूँ। इस योजना से प्राप्त लूम से बुनाई कर इस समय मैं लगभग 5000.00 से 8000.00 रूपये मजदूरी प्राप्त कर रहा हूँ। स्फूर्ति योजना आने के बाद मेरे साथ मेरे गांव के अन्य बुनकर भी जसपुर केन्द्र से कार्य प्राप्त कर अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार ला रहे हैं।
श्री शमशाद
(बुनकर)श्री शमशाद उम्र 50 वर्ष पुत्र श्री अब्दुल हनीफ निवासी सन्यासीवाला जसपुर जिला उधम सिंह नगर बताते हैं कि हमारा पैतृक पेशा बुनाई कताई है। पुराने करघे से बुनाई करने पर ताना करने में ज्यादा समय लगता था। स्फूर्ति योजना के अंतर्गत आये ताना मशीन द्वारा ताना किया हुआ मिलने से बुनाई की मात्रा में वृद्धि हुई है जिसका आर्थिक लाभ मिल रहा है। कताई हेतु कार्यशाला का निर्माण भी कराया गया। मेरा बैंक खाता भी खुलवा दिया है। अब हमारी मजदूरी व बोनस हमें बगैर खाते के माध्यम से प्राप्त होता है। बैंक में खाता खुलने सेे हम कुछ बचत भी कर पा रहे हैं।











